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काल चल चुका है पूरब की ओर से कही डेविल,लुइसिफर, एन्यूबिस, सेटन, एजारेल, दुल्लाहन, मालक अल-मौत, शैतान, फरिश्ते कही यमराज के रूप मे सिर्फ नाम बदला है काम एक ही है।

इसी को कहते है सामान सौ बरस का पल की ख़बर नही। सब परेशान है तमाम मकान,दुकान तो बना डाली पर ऐसे मकान दुकान का करोगे क्या। कल्पना करें उस इटैलियन करोड़पति का जो अपनी ही बनाई बिल्डिंग से कूद गया क्या मनोदशा होगी। उसके पास तब भी सब कुछ था नही था तो उसका परिवार क्योंकि सब इस बीमारी कोरोना से ग्रसित हो काल के ग्रास मे समा गये थे।

एक पोस्टर कल व्हाट्सएप पर देखा जिस पर कुछ इस तरह लिखा था” यह मेरा शरीर है
मै चाहे कुछ करू”। बेशक शरीर आप का है पर आपने इस समाज मे ही जन्म लिया है और हर समाज के कुछ नियम कायदे कानून है जो आपने ही बनाये है।

जब पृय्वी पर शुरुआत हुई तो दो मनुष्य थे मनु – श्रद्धा। उसके बाद चार आठ सोलह चौसठ हुए और जीवन की शुरुआत हुई। बिना किसी धर्म पर जाए मै बताना चाहता हूँ कि उसके बाद इन्ही लोगो द्वारा समाज में रहने के नियम बनाये जिनको आज हम विधि, कानून, कहते है और मानने को बाध्य है। ये नियम एक दिन में नही बने ऐसी ही तमाम परिस्थितियों के आने पर विधि बनती रही और समय समय पर सुधार भी आवश्यकता अनुसार होते रहे है और आगे भी होते रहेगे इससे इंकार नही किया जा सकता है ना करना चाहिए। समय की मांग के अनुरूप विधि को भी विकसित करना पड़ेगा।

अगर पृथ्वी पर जीवन शेष बचाना है तो स्वछंद आचरण छोड़ना ही होगा और एक सभ्य समाज का हिस्सा होना ही होगा यह नही हो सकता है कि कभी आप सभ्यता का हिस्सा हो गए और कभी आप अतीत में लौट गए निश्चित ही रूप से प्रत्येक व्यक्ति को अपनी पूजा पद्धति को अपनाने की आजादी है पर फिर वही प्रश्न खड़ा हो जाता है समय काल के अनुसार कायदे को तत्काल बदल दे अन्यथा काल के मुँह में आप समा जायगे ये हठधर्मिता आप का तो जो नुकसान करेगी ही इस समाज देश का भी इतना नुकसान होगा जिसका आंकलन नही किया जा सकता है।

समाज में शांति बनाए रखने का दायित्व हम सभी सभ्य लोगो का ही और यह कहने से नही चलेगा कि ऐसे ही चलेगा हम क्या कर सकते है सरकार जाने और सरकार क्या करती ही है। पहले आप अपने अंदर झाँक कर देखें कि आप क्या कर रहे है केवल गलती दूसरों पर डाल देने से समस्या का हल नही हो जाएगा कबूतर के आँख बंद कर लेने से समस्या का निदान नही होने वाला। एक बात और खाली गलती ढूढ़ने से भी बात नही बनेगी सौ अच्छाइयों में एक गलती होना संभव है पर उसको दूसरी दिशा देना गलत है। आज समय बदल गया है एक गलती निन्नानवे अच्छे कामो पर भारी नही पड़नी चाहिए सरकार सब जगह अच्छा काम स्वयं नही कर सकती है हम सब को बराबर से सहयोग करना ही होगा और समय के अनुसार अपने को बदलना ही पड़ेगा।

यह सही हैं कि यह शरीर आपका है पर गलती से आपके शरीर ने इस सभ्य समाज में जन्म लिया है।आपकी मज़बूरी है कि आप को सभ्य समाज के नियम को मानना ही पड़ेगा। यह विकल्प आपके पास हमेशा है कि इस सभ्य समाज के सदस्य रहे या मैदान छोड़ कर बाहर आ जाये। उसके लिए आपको इस सभ्यता के बाहर ऐसा मैदान खोजना ही होगा कि जहां आप चाहें मल मूत्र का त्याग कर दे पर इस सभ्य समाज में अब ऐसा किया जाना संभव नही रह गया है।

आज “पृथ्वी दिवस” (INTERNATIONAL MOTHER EARTH DAY) भी है तो हम सभी का इस अवसर पर यह पुनीत कर्तव्य है कि यदि इस धरती को बचाना है तो हम सभी को अपना सामुहिक योगदान देना ही होगा।इस पृथ्वी को अक्षुण्ण रखना है तो ऐसे लोगो को पैदा करना ही होगा जो हमारी संस्कृति सांस्कृतिक विरासत को बचा सके वरना इस पृथ्वी पर हमें रहने का कोई हक नही है ना अपितु इतना बल्कि ऐसी स्थिति में हम इस धरती को माँ भी बुलाने से कुछ समयांतराल के बाद वंचित हो जायेगे।

याद रखे आज आप की माँ गंभीर बीमारी से जूझ रही है अपनी माँ के साथ पूरी ताकत के साथ खड़े रहे अन्यथा कल पश्चयताप का मौका भी नही मिलेगा।

मै फिर ऊपर वाली बात पर आता हूँ ये मकान दुकान तो तब ही काम आएगा जब आप जीवित होंगे जैसा हमारे सर्वोच्च राजा का कहना है कि”जान है तो जहाँन है” अन्यथा सब व्यर्थ है।

काल चल चुका है काल जाति धर्म ईमान देख कर किसी को काल कवलित नही करता है वो चल चुका है चाहे आप किसी धर्म जाति के हो अगर वो आएगा तो सब को बहा ले जाएगा। आज आवश्यकता ना केवल अपने को बचाने की है बल्कि अपने परिवार के साथ साथ इस समाज व देश दुनिया को भी बचाया जाना आवश्यक है। अन्यथा सब समाप्त हो जाएगा। सब अभिमान,विचार, राजनीति समाप्त हो जाएगी।यह समय किसी भी प्रकार की राजनीति करने का नही बचा है। यदि हम यथाशीघ्र नही सुधरे तो इस धरती को माँ कहने के लिए आपके पूरे परिवार में कोई नही होगा। इसिलये आप सब से करबद्ध प्राथर्ना है कि जो भी नियम है जो आपके ही द्वारा बनाये गए है उनका पालन करें और जरूरत हो तो परिवार, समाज,देशहित में आवश्यक संशोधन होने दे।

आइये हम सब मिलकर आज इस पावन अवसर “पृथ्वी दिवस” (INTERNATIONAL MOTHER EARTH DAY) पर मिल कर प्रण ले कि अपनी माँ इस धरती को ना अपितु बचाना है बल्कि इसके गौरव में चार चांद लगाना है। ताकि आने वाली पीढ़ी को हम अपनी माँ को अक्षुण्ण रखते हुए सौंप सके।

जय माँ भारती। सौ सौ नमन।

जय भारत।
जय हिंद।

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3 COMMENTS

  1. Adaption is the situation demands else Lucifer is watching us. “KAAL CHAL CHUKA HAi” nicely portrayed Tandon Sir.
    Jai Hind!

    0

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Prahlad Tandon

Basically I belongs to legal fraternity. For last twenty years I am providing my services to the people of India on behalf of Judiciary. I have done my graduation in commerce and completed my Master’s of Law . Thereafter inducted in Bihar Judicial Services, Later on in Uttar Pradesh Judiciary afterwards became member of Higher Judicial Services . Apart from I concentrated on Indian Institute of Management Kolkata and Successfully done. Execute Programme in Global Business Management (EPGBM). I am also providing my services to Indian Institute of Management Lucknow as a Guest Faculty on my vacations. Now, I realize at this juncture of my life that there is another horizon so I contemplated my services to this writing platform to aware myself and the people. I desire to be Blessed by People.

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