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जनसंख्या नियंत्रण बिल

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जनसंख्या विस्फोट ने देश के प्राकृतिक संसाधनों, पर्यावरण, अपराध, अर्थव्यवस्था, खनिज व पेट्रोलियम दोहन, ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में अनुपातिक एवं सामाजिक असंतुलन पैदा कर दिया है।

भारत के राष्ट्रपति महामहिम रामनाथ कोविंद ने कहा है कि भारत जैसे बड़े और घनी आबादी वाले देशों को विशेष रूप से जनसंख्या नियंत्रण के विषय में सुविचारित कदम उठाने होंगे। अन्यथा हमारे देश में ऐसी आपदाओं के भीषण परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने कहा है कि यू0एस0ए0 में प्रत्येक दिन शिशु जन्म दर 10,247, चीन में 46,299 और भारत में 67,385 है। उन्होंने कहा कि इस वैश्विक महामारी के बाद हमें ’आर्थिक वैश्वीकरण’ से ’स्वास्थ्य वैश्वीकरण’ की दिशा में आगे बढ़ेंगे।

सन् 1948 जनगणना अधिनियम के अन्तर्गत पहली जनगणना सन् 1951 में आयोजित की गयी। ये देश की 9वीं जनगणना थी जिसमें देश की जनसंख्या 36 करोड़ 10 लाख थी। सन् 1941 की जनगणना की तुलना में 13.31% वृद्धि थी। सन् 1951 में जम्मू-कश्मीर को शामिल नहीं किया गया था। विस्थापित व्यक्तियों की सन् 1951 जनगणना के आधार पर 72 लाख 26 हजार मुस्लिम भारत से पाकिस्तान गये। सन् 1951 की जनगणना के अनुसार भारतवर्ष में हिन्दुओं की 30.60 करोड़, मुस्लिम 3.54 करोड (9.8%) और 83 लाख ईसाई थे।

सन् 2011 की जनगणना 15वीं जनगणना थी जिसमें भारत की कुल जनसंख्या 1 अरब 21 करोड़ (1,21,08,54,977) हो गई। जिसमें हिन्दुओं की जनसंख्या 96.80 करोड़ (79.80%) एवं मुसलमानों की जनसंख्या 17 करोड़ 19 लाख (17,19,41,407) (14.20%) हो गया। इसके अतिरिक्त 28 लाख 70 हजार (28,70,000) लोगों ने अपना कोई धर्म नहीं बताया। भारत विश्व में अपने दूसरे स्थान पर स्थिर रहा। सन् 2011 की जनसंख्या गणना के प्रतिशत अनुसार हिन्दू 79.80%, मुस्लिम 14.23%, ईसाई 2.30%, सिख 1.72%, बौद्ध 0.70%, जैन 0.37%, अन्य धर्म 0.66%, अचिन्हित/अव्यक्त 0.24% हैं।

सन् 1951 में जनसंख्या का हिन्दू प्रतिशत 84.10% के मुकाबले में 2011 में 79.80% अर्थात् 4.30% कम हो गया। यानि देश में हिन्दुओं की संख्या सन् 1951 के मुकाबले सन् 2011 में करीब 5 करोड़ 20 लाख (5,20,66,764) कम हो गई। जबकि इसी दौरान मुसलमानों की जनसंख्या 3.54 करोड़ (9.80%) से बढ़कर 17 करोड़ 19 लाख (17,19,41,407) यानि सन् 1951 की जनगणना से सन् 2011 तक आते-आते करीब 13 करोड़ 65 लाख (13,65,41,407) जनसंख्या में बढ़ोत्तरी दर्ज की गयी। जबकि इसी समय हिन्दुओं का प्रतिशत 4.30% कम हो गया जबकि मुस्लिमों का प्रतिशत 4.40% बढ़ गया। सन् 1951 में 9वीं जनसंख्या गणना थी जबकि सन् 2011 में 15वीं बार गणना हो रही थी।

जम्मू-कश्मीर में सन् 1951 में जनसंख्या 32 लाख 53 हजार (32,53,852) थी जो सन् 2011 की जनगणना के अनुसार 1 करोड़ 25 लाख (1,25,48,926) हो गई जो सन् 1951 की जनगणना के मुकाबले सन् 2011 की जनगणना के अनुसार करीब 4 गुना थी।

यह राजनैतिक बहस का विषय हो सकता है कि जब धर्म के आधार पर देश का विभाजन हुआ था तो पाकिस्तान (पूर्वी और पश्चिमी) को जाने वाले मुस्लिमों की संख्या केवल 72 लाख 26 हजार (72,26,000) थी। जबकि स्वतन्त्रता के केवल 4 वर्ष पश्चात् जनगणना में मुस्लिमों की जनसंख्या 3 करोड़ 54 लाख थी। इसमें जम्मू-कश्मीर के मुस्लिमों को शामिल नहीं किया गया था। यदि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जो सन् 1951 में जम्मू-कश्मीर में मुस्लिम जनसंख्या के आंकड़ों को जोड़ दिया जाये तो सन् 1951 में मुस्लिमों की जनसंख्या करीब 4 करोड़ हो जाती है। यानि धर्म के आधार पर देश का विभाजन एक छद्म विभाजन था। जबकि मात्र 20ः मुसलमान ही पाकिस्तान गया। शेष बहुसंख्या मुसलमान भारत में ही रूक गया। कुल 28 राज्यों व 8 संघशासित क्षेत्र में से 8 राज्यों में हिन्दू अल्पसंख्यक हो चुका है। परन्तु यह उचित समय नहीं है कि इस समय इस विषय पर बहस की जाये।

भारत के पहले लोकसभा चुनाव सन् 1952 में लोकसभा में 489 सीट व राज्यसभा में 216 सीट थी जो वर्तमान समय में 545 सीट लोकसभा में, 245 सीट राज्यसभा में करनी पड़ी है। स्वतन्त्र भारत में 14 राज्य थे जो आज बढ़कर 28 राज्य व 8 संघशासित क्षेत्र हो गये हैं। लोकसभा व राज्यसभा में सीटों की गणना जनसंख्या आधार पर ही होती है। भारत के प्रत्येक राज्य को उसकी जनसंख्या के आधार पर लोकसभा सदस्य मिलते हैं। भारत के संविधान द्वारा (सन् 1973 संविधान संशोधन द्वारा) कुल लोकसभा की अधिकतम सीटें 550 निर्धारित की हैं। सन् 1951 में 3.54 लाख मतदाता के विरूद्ध सन् 2014 में 15 लाख से अधिक मतदाता की संख्या एक लोकसभा प्रत्याशी हेतु थी।

देश में अटल बिहारी बाजपेई सरकार के समय जनसंख्या पर नियंत्रण के उद्देश्य हेतु सन् 2000 में वेंकटचलैया आयोग का गठन किया था और आयोग ने भी जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने की सिफारिश की थी। न अपितु इतना बल्कि मई 2000 में एक ’राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग’ भी बनाया गया जिसकी अध्यक्षता स्वयं देश के प्रधानमंत्री व सभी राज्यों के मुख्यमंत्री सदस्य के रूप में थे। आयोग का कार्य ही जनसंख्या पर प्रभावी पर्यवेक्षण, निरीक्षण करना था व स्वास्थ्य, शिक्षा का ध्यान रखते हुए राष्ट्रीय जनसंख्या नीति को बनाया जाना था। इसके उपरान्त भी पता नहीं क्यों जबकि स्वयं देश के प्रधानमंत्री अध्यक्ष थे, इतने वर्षों से इस अत्यन्त महत्वपूर्ण देश की व सामाजिक समस्या को गम्भीरता से नहीं लिया गया या किन्हीं कारणों से सारा मामला ठंडे बस्ते में डाले रहने दिया।

जनसंख्या नियंत्रण हेतु कांगे्रस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी द्वारा राज्यसभा में एक प्राईवेट मेंबर बिल पेश करना प्रस्तावित है। हाल ही में भाजपा सांसद ने भी जनसंख्या नियंत्रण की मांग लोकसभा में की है और कहा कि देश का विकास बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और बिल में कठोरतम प्रावधान होने चाहिए और दो से अधिक बच्चों वालों को सभी सरकारी सुविधाओं से वंचित कर दिया जाना चाहिए। शिवसेना सांसद द्वारा राज्यसभा में भी जनसंख्या नियंत्रण पर प्राईवेट बिल लाते हुए हुए संविधान के अनुच्छेद 47 में संशोधन करने हेतु पेश किया गया है। ’’राज्य के द्वारा छोटे परिवार को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, जो अपने परिवार में दो बच्चे पैदा करने को बढ़ावा देगा उन्हें टैक्स, रोजगार, शिक्षा में भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए और जो छोटे परिवार को बढ़ावा नहीं देता है उसे लाभ नहीं मिलेगा और मिल रहा है उसे भी वापस लिया जाना चाहिए।’’ इसके पूर्व भी ऐसे प्राईवेट बिल संसद में लाये जा चुके हैं।

माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने जनसंख्या नियंत्रण से सम्बन्धित पूर्व में जनहित याचिका को यह कहते हुए निरस्त कर दिया था कि कानून को बनाने का निर्देश देना कोर्ट का काम नहीं है। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति जस्टिस गोविन्द माथुर व न्यायमूर्ति विवेक वर्मा की खण्डपीठ ने पारित किया था। माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित करने के दो शिशुओं की नीति सहित कुछ अन्य नीतियों को लागू करने की मांग करने वाली जनहित याचिका खारिज की थी और इसी आदेश को भारतीय जनता पार्टी के एक नेता व वकील ने फैसले को चुनौती माननीय सर्वोच्च न्यायालय में दी है।

माननीय महामहिम द्वारा आर्थिक वैश्विकरण से स्वास्थ्य वैश्विकरण का सुझाव इसी कारण से दिया गया है कि सरकार स्वास्थ्य सभी तमाम योजनाएं क्षेत्र में लागू करने में अपने आप को असमर्थ पाती है क्योंकि जितनी भी स्वास्थ्य योजनाएं लागू की जाती हैं वे सभी योजनाएं जनसंख्या विस्फोट के कारण अपर्याप्त साबित हो जाती हैं। सन् 1947 में 19 मेडिकल काॅलेज और मात्र 1,000 छात्र ही थे। जबकि आज देश में 571 सरकारी व 996 प्राईवेट मेडिकल काॅलेज से करीब 50,000 डाॅक्टर भारत स्वास्थ्य क्षेत्र को समर्पित करता है।

जनसंख्या विस्फोट ने देश के प्राकृतिक संसाधनों में पर्यावरण, वन, वन्यजीव, मौसम, प्रदूषण को गम्भीर तरीके से प्रभावित किया है। जनसंख्या बढ़ोत्तरी ने देश में अपराध व कानून को भी प्रभावित किया है। उद्योग, व्यापार, श्रम और कार्यबल, अर्थव्यवस्था को गम्भीर रूप से क्षति पहुंचाई है।

जनसंख्या बढ़ोत्तरी से खान और खनिज पदार्थों का दोहन, पेट्रोलियम पदार्थों की अनुपलब्धता, ऊर्जा की कमी व स्त्रोतों का अत्यधिक दोहन, ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में अनुपातिक असंतुलन इसी कारण परिणाम है। जनसंख्या के कारण सामाजिक असंतुलन का पैदा होना और तमाम सामाजिक व कल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी रूप से लागू किया जाना असम्भव हो गया है। जिससे तमाम सामाजिक विषमता व जटिलता पैदा होती जा रही है और समय अंतराल के साथ ऐसी विषमता में बढ़ोत्तरी ही होगी जिसका दुष्प्रभाव निश्चित रूप से सम्पूर्ण समाज व देश पर पड़ना अवश्यंभावी है जिसको रोकने व प्रभाव को कम करने का एकमात्र उपाय जनसंख्या नियंत्रण कानून ही है।

विश्व के बहुत से देश आबादी के विस्फोट से परेशान होकर जनसंख्या नियंत्रण कानून व नीति बना रहे हैं या बना चुके हैं। यहां यह भी कहना उल्लेखनीय है कि कई मुस्लिम देशों में जनसंख्या नियंत्रण के सम्बन्ध में कानून व नीति पहले से उपलब्ध है। वहीं रूस जैसे देश 8.60 बिलियन डाॅलर से अधिक शिशु पैदा करने पर खर्च कर रहे हैं। जापान, साऊथ कोरिया, रोमानिया जैसे देश अपनी शिशु वृद्धि दर को प्रोत्साहन पैकेज दे रहे हैं। देश के प्रधानमंत्री द्वारा स्वयं 15 अगस्त को बढ़ती जनसंख्या पर चिन्ता जताई थी और कहा था कि आने वाली पीढ़ी के लिये संकट पैदा हो सकता है। निश्चित रूप से जनसंख्या प्रत्येक देश की काल-परिस्थितियों पर निर्भर करती है। इसके सम्बन्ध में कोई एक सर्वमान्य सिद्धान्त या सूत्र नहीं हो सकता है। प्रत्येक देश को अपनी परिस्थितियों के अनुरूप ही सिद्धान्त या सूत्र तलाशने होते हैं। वर्तमान समय में महामहिम के सुझाव को तत्कालिक आवश्यकता समझते हुए जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने हेतु विधि निर्माण की आवश्यकता है।

जय भारत
जय हिन्द

1+

5 COMMENTS

  1. जनसंख्या नियंत्रण और भारत की वर्तमान स्थिति आंकड़ों के साथ स्पष्ट करता हुआ लेख। सहेज कर रखने लायक ब्लॉग पोस्ट है यह।

    0
  2. बहुत बढ़िया, पढ़ कर खुशी हुई कि अब भारत जाग रहा हैं।
    बाबा भोलेनाथ जी सदैव अपने आशीर्वाद के साथ आपको देशहित में हमेशा प्रोत्साहित करते रहे।
    जय हिंद।
    वन्देमातरम।

    0

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Prahlad Tandon

Basically I belongs to legal fraternity. For last twenty years I am providing my services to the people of India on behalf of Judiciary. I have done my graduation in commerce and completed my Master’s of Law . Thereafter inducted in Bihar Judicial Services, Later on in Uttar Pradesh Judiciary afterwards became member of Higher Judicial Services . Apart from I concentrated on Indian Institute of Management Kolkata and Successfully done. Execute Programme in Global Business Management (EPGBM). I am also providing my services to Indian Institute of Management Lucknow as a Guest Faculty on my vacations. Now, I realize at this juncture of my life that there is another horizon so I contemplated my services to this writing platform to aware myself and the people. I desire to be Blessed by People.

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