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रक्त रंजित पुरस्कार

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यह पुरस्कार भारत माता को बलात् नग्न कर खींची गयी तस्वीरों को दिया गया है और शहीद जवानों के खून से सने प्रमाण-पत्र व मेडल हैं।

Kashmiri Muslim devotees offer prayer outside the shrine of Sufi saint Sheikh Syed Abdul Qadir Jeelani in Srinagar in December 2019. The image was part of a series of photographs by photojournalists Mukhtar Khan, Dar Yasin and Channi Anand, three Associated Press photographers based in Srinagar and Jammu, who were awarded the 2020 Pulitzer Prize for Feature Photography. (AP/Mukhtar Khan)

पुलित्जर पुरस्कार 2020 के लिए फोटोग्राफी श्रेणी में एसोसिएटेड प्रेस के तीन भारतीय फोटोग्राफर्स क्रमशः चन्नी आनन्द, मुख्तार खान और यासीन डार को पुरस्कृत करने की घोषणा वर्चुअली की गई। इनमें से अधिकांश तस्वीरें संविधान के अनुच्छेद 370 निरस्त किये जाने के बाद जम्मू-कश्मीर के हालातों को दिखाने के सन्दर्भ में ली गई थी।

Dar Yasin, Mukhtan Khan and Channi Anand

पुलित्जर पुरस्कार, जोसेफ पुलित्जर जो एक समाचार-पत्र प्रकाशक व कोलम्बिया विश्व विद्यालय के प्रशासक भी थे, उनकी वसीयत के आधार पर सन् 1917 में संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थापना की गई थी। जोसेफ पुलित्जर से अपनी वसीयत के द्वारा धनराशि कोलम्बिया विश्व विद्यालय में पत्रकारिता स्कूल बनाने और पुरस्कार वितरण हेतु दी थी। पुरस्कार समाचार-पत्र, पत्रिका, आनलाईन पत्रिका, साहित्य व संगीत रचना हेतु 21 श्रेणियों में उत्कृष्ट उल्लेखनीय कार्य सम्पादन के लिए प्रमाण-पत्र, एक सोने का मेडल और एक लाख डाॅलर का नकद पुरस्कार दिया जाता है।

पुलित्जर पुरस्कार स्वयं (ऑटोमैटिक ) प्राप्त नहीं होता है बल्कि केवल निश्चित शुल्क जमा करने वाले प्रवेशार्थी को मिलता है। पुरस्कार में श्रेणियों के लिए 20 व्यक्तियों की निर्णायक समिति होती है जिसे निर्वाचन समिति कहना ज्यादा उचित होगा। उनमें से एक अनुशंसा करता है।

आरम्भ से ही यह पुरस्कार विवादों के घेरे में रहा और आरोप लगते रहे कि यह पुरस्कार उदारपंथी गुट को प्रोत्साहित करता है और कट्टर रूढ़िवादी अभियान, आन्दोलन का विरोध करता है और यह भी अनुमान लगाया जाता है कि इसी कारण से वर्षों से गिने-चुने, केवल इकाई में कट्टर रूढ़िवादी को पुरस्कार दिया गया है।

एसोसिएटेड प्रेस समाचार एजेन्सी की स्थापना सन् 1846 में स्थापित की गई थी जिसका मुख्यालय न्यूयार्क शहर में स्थित है। इस समाचार एजेन्सी को अब तक 53 पुलित्जर पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं जिसमें से 31 पुरस्कार फोटोग्राफी क्षेत्र से हैं।

पुरस्कार विजेता चन्नी आनन्द सीमा सुरक्षा बल सिपाही जो आर एस पुरा जैसे महत्वपूर्ण सीमा स्थल पर निगरानी हेतु तैनात थे एवं जम्मू के निवासी भी हैं। मुख्तार खान और यासीन डार श्रीनगर से हैं।

फोटोग्राफर यासीन डार ने कहा है कि अनुच्छेद 370 निरस्त होने के बाद काम करना चूहे-बिल्ली के खेल जैसा था। बन्द सडको पर घूमकर, कई बार अजनबियों के घरों में रहकर और सब्जी के बैग में कैमरा छिपाकर हम लोग फोटोग्राफ तस्वीर लेते थे। दूसरे विजेता ने कहा है कि, ’’ऐसा लगता है यह मेरी अपनी कहानी पर खींची गई फोटो हैं।’’

इसी पुरस्कार प्राप्ति पर एक बड़े कांग्रेस नेता ने ट्वीट किया है कि, ’’जम्मू-कश्मीर में जीवन की प्रभावशाली तस्वीरों के लिये पुलित्जर पुरस्कार जीतने वाले भारतीय फोटोग्राफर यासीन डार, मुख्तान खान और चन्नी आनन्द को बधाई। आपने हमें गौरवान्वित किया है।’’

जबकि देश के हंदवाड़ा (जम्मू-कश्मीर) में आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान 5 सेना व पुलिस के जवान जिनमें कर्नल आशुतोष शर्मा, मेजर अनुज सूद, नायक राजेश, लांसनायक दिनेश सिंह व एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर शहीद हुए हैं। इन शहीद जवानों के अभी खून के छींटें सूखे भी नहीं थे कि देश में ऐसे तथाकथित फोटोग्राफरों की तस्वीरों को पुरस्कृत किया जाना घाव को हरा करने सरीखा है।

यह पुरस्कार ऐसी तस्वीरों को है जो भारत की विपरीत छवि विश्व में पेश करती हैं और प्रत्येक तस्वीर एवं पुरस्कार कहता है कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग नहीं है – भारत ने कश्मीर को जबरन कब्जे में रखा है। और ऐसी ही शर्मनाक तस्वीरों पर हमारे देश के महानुभाव राजनेताओ में गर्व से गौरवान्वित हो बधाई देने की होड़ मची हुई है और भूतपूूर्व मुख्यमंत्री परिवार द्वारा यह कहा जा रहा है कि यह कश्मीर मंे पत्रकारों के लिए मुश्किल साल था।

ताजा घटनाक्रम के अनुसार दूसरे हमले में हंदवाड़ा में 3 जवान सी0आर0पी0एफ0 के शहीद हुए हैं। उसके पश्चात् बड़गाम में 2 जवान सी0आई0एस0एफ0 के व 4 नागरिक ग्रेनेड हमले में गम्भीर रूप से घायल हुए हैं।

इससे पूर्व फरवरी-2019 में पुलवामा हमले में देश के 40 जवान शहीद हुए थे एवं 35 जवान गम्भीर रूप से घायल हुए थे। इन शहीद जवानों की अस्थियों का विसर्जन अभी हुआ ही था कि उस समय अन्तराल वर्ष की तस्वीरों का पुरस्कृत किया जाना बेहद निन्दनीय एवं किसी षड्यंत्र का हिस्सा प्रतीत होती है।

यह पुरस्कार भारत माता को बलात् नग्न कर खींची गयी तस्वीरों को दिया गया है। ऐसी प्रत्येक तस्वीर भारत के शहीद जवानों की मृत्यु शय्या पर अट्टहास करती प्रतीत होती है। ऐसे तथाकथित फोटोग्राफरों का कृत्य एवं तस्वीरें व पुरस्कार शहीद जवानों के खून से सने प्रमाण-पत्र व मेडल हैं और पुरस्कार राशि शहीद जवानों के कफन को विदेशियों से सौदा कर प्राप्त की गई है।

ऐसे सभी व्यक्तियों, संस्थानों, एन0जी0ओ0, कम्पनियों पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाया जाना आवश्यक है जो कभी मानवाधिकार के नाम पर या कभी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर देश के आम नागरिकों को गुमराह करते हुए देश में देश के विरूद्ध षड्यंत्र के अन्तर्गत विद्रोही गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं। ऐसी किसी भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को जो देश के न्यूनतम सम्मान के विरूद्ध हो, स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।

आज इस बात की आवश्यकता है कि ऐसे व्यक्तियों के विरूद्ध जो देश की छवि विश्व पटल पर किसी विदेशी संस्था के लिए, देश में रहते हुए, देश विरोधी कृत्य हेतु षड्यंत्र के अन्तर्गत खराब करते हों, केवल निन्दा या बहिष्कार किया जाना ही पर्याप्त नहीं हैं बल्कि अब समय आ गया है ऐसे षड्यंत्रों पर कठोर कार्यवाही की जाये। ऐसे षड्यंत्रकारियों को देशद्रोही घोषित करते हुए उनके विरूद्ध कठोर कानूनी कार्यवाही किये जाने की जनमानस की अपेक्षा है। यहां यह भी कहना उल्लेखनीय है कि ऐसी सभी देश विरोधी गतिविधियां जो विदेशी धरती से संचालित हो रही हैं, ऐसे संस्थानों, कम्पनियों विशेषकर जो भारत देश की सम्पूर्ण विश्व में किसी सुनियोजित षड्यंत्र के अन्तर्गत छवि खराब कर रही हों एवं देश में, देश के जनमानस को विद्रोह के लिये बरगला रही हों, तत्काल प्रभाव से रोके जाने व प्रतिबन्धित किये जाने के साथ कठोर कार्यवाही किये जाने की आवश्यकता है।

जय भारत
जय हिन्द

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Prahlad Tandon

Basically I belongs to legal fraternity. For last twenty years I am providing my services to the people of India on behalf of Judiciary. I have done my graduation in commerce and completed my Master’s of Law . Thereafter inducted in Bihar Judicial Services, Later on in Uttar Pradesh Judiciary afterwards became member of Higher Judicial Services . Apart from I concentrated on Indian Institute of Management Kolkata and Successfully done. Execute Programme in Global Business Management (EPGBM). I am also providing my services to Indian Institute of Management Lucknow as a Guest Faculty on my vacations. Now, I realize at this juncture of my life that there is another horizon so I contemplated my services to this writing platform to aware myself and the people. I desire to be Blessed by People.

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