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भगवान बुद्ध का भारतीय संविधान

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भगवान बुद्ध का दर्शन भारत के संविधान में समानता और बंधुत्व की भावना का समावेश, उन्नति के समान अवसर, भ्रातृत्व की भावना, विचारों की स्वतंत्रता और सामाजिक समरसता, लोक कल्याणकारी राज्य से ओत-प्रोत है।

वैशाख अर्थात् वेसाक उत्सव बुद्ध पूर्णिमा को विश्व भर के बौद्धों एवं अधिकांश हिन्दुओं द्वारा मनाया जाता है। इसी दिन गौतम बुद्ध का जन्म महापरिनिर्वाण हुआ था तथा इसी दिन उन्हें बोधि की प्राप्ति हुई थी। विभिन्न देशों में इस पर्व को अलग-अलग नामों से जाना जाता है। हांगकांग में ’बुद्ध जन्म दिवस’, सिंगापुर में ’वेसाक दिवस’, इण्डोनेशिया में ’वैसक’, थाईलैण्ड में ’वैशाख बुच्छ दिन’ कहते हैं।

गौतम बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व व निर्वाण 483 ईसा पूर्व में लुम्बिनी नेपाल में इक्ष्वाकु वंशीय क्षत्रीय शासन कुल के राजा शुद्धोधन के घर में हुआ था। मां का नाम महामाया था। सिद्धार्थ अपनी धर्मपत्नी यशोधरा और नवजात शिशु राहुल को त्याग कर, संसार को जन्म-मरण, दुख से मुक्ति दिलाने के मार्ग एवं सत्य की खोज के लिये सम्पूर्ण राजपाठ त्याग कर साधना हेतु प्रस्थान कर गये और बोध गया (बिहार) में बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई और सिद्धार्थ से बुद्ध कहलाये।

भगवान बुद्ध के ’बहुजन हिताय’ लोक कल्याण के धर्म का देश विदेश में प्रचार करने में अशोक सम्राट ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बौद्ध धर्म भारत से निकल कर चीन, जापान, कोरिया, मंगोलिया, बर्मा, थाईलैण्ड, श्रीलंका, इण्डोनेशिया, सिंगापुर, हांगकांग आदि देशों में फैला। बुद्ध को हिन्दू धर्म में भगवान बुद्ध के रूप में विष्णु का अवतार माना जाता है।

भारत के संविधान निर्माता डाॅ0 बी0आर0 अम्बेडकर स्वयं बौद्ध धर्म के अनुयायी थे। शायद इसीलिये बौद्ध धर्म का प्रभाव संविधान पर भी परिलक्षित होता है। भगवान बुद्ध श्रमण थे। बौद्ध धर्म श्रमण परम्परा का वाहक है। श्रमण शब्द संस्कृत के ’समण’ शब्द से बना है जिसके तीन रूप श्रमण, समन, शमन हैं। श्रमण परम्परा का आधार इन्हीं शब्दों से हुआ। श्रमण शब्द ’श्रम’ धातु से बना है जिसका अर्थ है ’परिश्रम करना’। ’समन’ का अर्थ है समता का भाव अर्थात् सबके प्रति एक सा समभाव रखना। और ’शमन’ का अर्थ है शान्त रखना या निरोध करना अर्थात् ऐसा व्यक्ति जो अपनी वृत्तियों को संयमित करते हुए जीवन जीता है।

श्रमण शब्द का उल्लेख वृहदारण्यक उपनिषद में हुआ है। श्रमण भिक्षु या साधु को कहते हैं जो सर्वविरत कहलाता है। यह शब्द बताता है कि व्यक्ति अपना विकास सिर्फ अपने परिश्रम से कर सकता है। जितने भी मानव को सुख-दुख, उन्नति-पतन होते हैं, उन सभी के लिए वह स्वयं उत्तरदायी है।

दूसरा शब्द समन अर्थात् समता का भाव। भारतीय संविधान में इसी समता के भाव को अनुच्छेद 14 में समता अधिकार के अन्तर्गत उल्लेख किया गया है जो इसी ’समन’ शब्द से उत्पन्न हुआ है। ’’राज्य किसी नागरिक के खिलाफ सिर्फ धर्म, मूल, वंश, जाति, लिंग, जन्म स्थान या इनमें से किसी के आधार पर कोई भेद नहीं करेगा।’’ भारत के राज्य क्षेत्र में किसी व्यक्ति को कानून के समक्ष समता से या कानून के समान संरक्षण से वंचित नहीं करेगा।

तीसरा शब्द है शमन अर्थात् शान्त रखना, शान्त कराना। आधुनिक आपराधिक विधि के दो मुख्य आधार पहला ऐसे मामले जो शमन से इतर हो यानि शमनीय न हो। दूसरा ऐसे मामले जो शमनीय हो अर्थात् जिनमें शमन किया जा सकता हो अर्थात् ऐसे प्रकरण जिनको शान्ति, सौहार्द से सुलझाते हुए शमन करा लिया जाये। और यही शब्द ’’शान्ति’’, ’’सुलह’’ राष्ट्रीय विधि सेवा प्राधिकरण का मूल उत्पत्ति स्त्रोत है एवं इसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु सन् 1987 में विधि सेवा प्राधिकरण का गठन हुआ है।

बुद्ध पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर यह गौरव का विषय है कि भारत के संविधान में समानता और बंधुत्व की भावना का समावेश, उन्नति के समान अवसर, भ्रातृत्व की भावना, विचारों की स्वतंत्रता और सामाजिक समरसता, लोक कल्याणकारी राज्य भगवान बुद्ध के बौद्ध दर्शन से ओत-प्रोत होकर एक प्रभावशाली व समृद्ध शासन प्रणाली का प्रादुर्भाव हुआ है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि भारत का सम्पूर्ण संविधान बुद्ध दर्शन से गहरा प्रभावित है और भगवान बुद्ध के आदर्शों व कथनों को सहेज कर समाहित किये हुए है।

जय भारत
जय हिन्द

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Prahlad Tandon

Basically I belongs to legal fraternity. For last twenty years I am providing my services to the people of India on behalf of Judiciary. I have done my graduation in commerce and completed my Master’s of Law . Thereafter inducted in Bihar Judicial Services, Later on in Uttar Pradesh Judiciary afterwards became member of Higher Judicial Services . Apart from I concentrated on Indian Institute of Management Kolkata and Successfully done. Execute Programme in Global Business Management (EPGBM). I am also providing my services to Indian Institute of Management Lucknow as a Guest Faculty on my vacations. Now, I realize at this juncture of my life that there is another horizon so I contemplated my services to this writing platform to aware myself and the people. I desire to be Blessed by People.

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