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प्रवासी पलायन

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मजदूरों द्वारा शहरों से गांव की ओर लौटना इसको उत्क्रम पलायन (Reverse Migration) कहा जा सकता है जिससे नई समस्या की शुरूआत लाॅकडाउन खुलने के पश्चात होगी। यदि उद्योग धन्धें व कल-कारखानों पर प्रभाव पड़ा तो देश की अर्थव्यवस्था प्रभावित होना स्वाभाविक है।

पलायन का शाब्दिक अर्थ है ‘अन्यत्र चले जाना, भागना अर्थात एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने की क्रिया या भाव।‘ सामान्य रूप से अपने मूल स्थान को छोड़कर अपने बेहतर जीवन के लिए किसी शहर की ओर जाना। जहां पर संसाधनों के जरिए जीवन स्तर व भविष्य को चाहे वह रोजगार के जरिए या शिक्षा के जरिए उज्जवल किया जा सके।

देश में करोड़ों मजदूर कृषि, बागवानी, ईंट भट्टों, भवन निर्माण, खदानों व बड़ी संख्या में उत्पादन निर्माण, उद्योग धन्धों, औद्योगिक कल कारखानों में काम करने वाले मजदूर, सेवा या परिवहन क्षेत्र व सिर पर बोझा ढोने वाले मजदूर, फेरीवाले, रिक्शा चालक हैं, जो गांव से शहरों में जाकर कार्य करते हैं। इसे शहरीकरण या नगरीकरण कहा जाता है। देश में औद्योगिकरण मजदूरों का गांव से शहर की ओर पलायन सबसे बड़ा कारण बना। इसके पश्चात अच्छा जीवन स्तर, अच्छी तकनीकि सुविधा, अच्छी स्वास्थ्य सुविधा व अच्छी शिक्षा-दीक्षा भी पलायन का मुख्य कारण है।

हमारे देश की अर्थव्यवस्था का मुख्य स्त्रोत कृषि आधारित था जो धीरे-धीरे मिश्रित अर्थव्यवस्था औद्योगिकरण के साथ हो गयी। मजदूरों के पलायन ने पहले कृषि व्यवस्था को प्रभावित किया बल्कि शहरीकरण के कारण शहरों में भी जनसंख्या को लेकर असंतुलन पैदा हुआ जो 2018 तक आते-आते शहरों में जनसंख्या घनत्व 34 प्रतिशत हो गया। औद्योगिकरण के पश्चात इस समस्या से सामंजस्य बैठा ही था कि वैश्विक बीमारी कोरोना ने आकर पुनः इस ढाॅंचे को तहस-नहस कर दिया और औद्योगिरकण व उद्योग धन्धों की रफ्तार को थाम लिया।

वैश्विक बीमारी कोरोना से भयाक्रान्त होकर मजदूरों द्वारा शहरों से गांव की ओर पुनः लौटना शुरू कर दिया। इसको उत्क्रम पलायन (Reverse Migration) कहा जा सकता है जिससे नई समस्या की शुरूआत लाॅकडाउन खुलने के पश्चात होगी। हमारे नीति-निमार्ताओं का ध्यान अभी तक इस समस्या पर नहीं गया है। पलायन पहले गांव से शहर की ओर था और ऐसा होने पर औद्योगिकरण व उद्योग धन्धों ने अपनी रफ्तार पकड़ी और देश में उद्योग धन्धें जैसे-जैसे तरक्की करते गए वैसे-वैसे सरकार को टैक्स के रूप में एक बड़ी धनराशि प्राप्त होने लगी और देश में सामाजिक सुविधाओं का निर्माण भी उसी तेजी से होने लगा।

प्रवासी मजदूरों के वापस लौटने के कारण अब गांवों में रोजगार का असंतुलन पैदा हो गया है जिसके लिए सरकार द्वारा मनरेगा जैसी योजनाएं चलायी जा रही हैं, परन्तु जिस प्रकार से यह वापसी है शहरों में भी स्वाभाविक रूप से असंतुलन पैदा होना ही है। यह मजदूर शहरों में रिक्शा चालक से लेकर तमाम प्रकार के निर्माण, उद्योग धन्धों व कल-कारखानों में कार्यरत थे और शहरी व्यवस्था को संभाले हुए थे। अचानक इस तरह से गांव जाने पर लाॅकडाउन के खुलते ही एक शून्य स्थान सभी उद्योग धन्धों व कल-कारखानों में पैदा हो जाना है।

प्रवासी मजदूरों के गांव लौटने पर गांव में कितने रोजगार उपलब्ध हैं इसकी कोई संख्या उपलब्ध नहीं है और अगर सरकार द्वारा रोजगार उपलब्ध करा भी दिए गए तो इनके स्थानों पर शहरों में कौन काम करेगा इस मुद्दे पर सोचा जाना आवश्यक है। आज सरकार ने अपनी सारी शक्ति गांवों में रोजगार सृजन के लिए केन्द्रित कर दी है, परन्तु इसके दूरगामी परिणाम बड़े गंभीर हैं। एक तो उद्योग धन्धों, कल-कारखानों की ऐसे ही लाॅकडाउन के कारण दुर्दशा हो चुकी है और श्रमिक वर्ग का शहरों से मोह भंग हो चुका है। यदि श्रमिकों को गांव में ही श्रम मिल जायेगा तो शहरों की तरफ वह नहीं मुडे़गा। ऐसी परिस्थितियों में शहरी उद्योग धन्धों व कल-कारखानों का क्या होगा और यदि उद्योग धन्धें व कल-कारखानों पर प्रभाव पड़ा तो देश की अर्थव्यवस्था प्रभावित होना स्वाभाविक है। जिस पर अगर अभी से विचार करते हुए कोई कदम नहीं उठाया गया तो देश के उद्योग धन्धों व औद्योगिकरण को दूसरे गहरे आघात से नहीं बचाया जा सकता।

जय भारत,

जय हिन्द

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  1. बहुत सुंदर पंक्तियां सत्य पर आधारित है

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Prahlad Tandon

Basically I belongs to legal fraternity. For last twenty years I am providing my services to the people of India on behalf of Judiciary. I have done my graduation in commerce and completed my Master’s of Law . Thereafter inducted in Bihar Judicial Services, Later on in Uttar Pradesh Judiciary afterwards became member of Higher Judicial Services . Apart from I concentrated on Indian Institute of Management Kolkata and Successfully done. Execute Programme in Global Business Management (EPGBM). I am also providing my services to Indian Institute of Management Lucknow as a Guest Faculty on my vacations. Now, I realize at this juncture of my life that there is another horizon so I contemplated my services to this writing platform to aware myself and the people. I desire to be Blessed by People.

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