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हिन्दू साम्राज्य दिवस

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महान् हिन्दू शासक छत्रपति शिवाजी महाराज ने हिन्दू साम्राज्य का स्वप्न भारतवासियों को दिखाया एवं देश में धर्म, संस्कृति व समाज का संरक्षण कर स्वतंत्र राष्ट्र बनाये जाने की नींव डाली।

आज देश ‘हिन्दू साम्राज्य दिवस‘ मना रहा है। शिवाजी का जन्म 1627 ई0 में माता जीजाबाई व शाहजी भोसले के संसर्ग से शिवनेरी के किले में हुआ था। हिन्दू माह ज्येष्ठ के शुक्ल त्रयोदशी को अर्थात आज ही के दिन 4 जून 1674 ई0 को मराठा साम्राज्य के संस्थापक महान् शासक शिवाजी का राज्याभिषेक महाराष्ट्र के रायगढ़ के किले में किया गया था। राज्याभिषेक से छत्रपति की उपाधि मिली। छत्रपति शिवाजी के राज्याभिषेक की वर्षगांठ को ‘हिन्दू साम्राज्य दिवस या शिवराज्याभिषेक दिवस‘ के रूप में मानाया जाता है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा इसे उत्सव के रूप में प्रत्येक वर्ष मनाया जाता है। आर0एस0एस0 का यह विचार है कि शिवाजी महाराज के राजतिलक के पश्चात हिन्दू साम्राज्य भारत में पुनः अस्तित्व में आया। शिवाजी महाराज ने इस दिन स्वयं घोषणा की थी कि हिन्दू स्वशासन की स्थापना की जानी चाहिए, यही भगवान की इच्छा है। मराठा साम्राज्य के महान् शासक और वीर योद्धा छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा मातृभूमि के लिए अपने प्राणों को न्योछावार करते हुए सन् 1680 में वीरगति को प्राप्त हो गये।

छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा मराठा योद्धाओं को संगठित करते हुए बीजापुर के सुल्तान आदिल शाह व मुगलों खिलाफ बड़ी वीरतापूर्वक लड़े जिस कारण औरंगजेब को बीजापुर से संधि करने पर मजबूर होना पड़ा। बाद में बीजापुर के सुल्तान द्वारा शिवाजी के साथ समझौता किया। सन् 1662 में हुई संधि के अनुसार शिवाजी को बीजापुर के सुल्तान द्वारा स्वतंत्र शासक की मान्यता प्राप्त हुई। इस संधि के अनुसार उत्तर में कल्याण से लेकर दक्षिण में पोण्डा तक(250 किमी) का और पूर्व में इन्दापुर से लेकर पश्चिम में दावुल तक(150 किमी) का भू-भाग शिवाजी के नियंत्रण में आ गया। शिवाजी के सेना में तीस हजार पैदल व एक हजार घुड़सवार सैनिक थे। शिवाजी द्वारा औरंगजेब द्वारा भेजे गये सूबेदार शाइस्ता खां को युद्ध में हराते हुए भागने पर मजबूर किया। सन् 1668 में शिवाजी ने मुगलों के साथ संधि की और औरंगजेब ने शिवाजी को राजा की मान्यता दी।

पश्चिमी महाराष्ट्र में स्वतंत्र हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के पश्चात शिवाजी ने अपना राज्याभिषेक करना चाहा परन्तु मुस्लिम सैनिकों ने ब्राम्हणों को धमकी दी की जो भी शिवाजी का राज्याभिषेक करेगा उसकी हत्या कर दी जायेगी। शिवाजी ने इसे चुनौती के रूप में लिया और यह कहा कि मुगलों के अधिकार क्षेत्र के किसी ब्राम्हण से ही राज्याभिषेक करायेंगे और काशी के ब्राम्हण गंगाभट्ट के द्वारा शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक किया गया। इसी कारण से छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक का महत्व और बढ़ जाता है।

छत्रपति शिवाजी ने अपने राज्याभिषेक के बाद अपने मंत्री रामचन्द्र अमात्य को राजकीय उपयोग में आने वाले फारसी शब्दों के लिए उपयुक्त संस्कृत शब्द निर्मित करने का कार्य दिया था। रामचन्द्र अमात्य ने ‘राज्यव्यवहारकोश‘ नाम ग्रन्थ लिखा जिसमें 1380 फारसी शब्दों के संस्कृत अनुवाद शब्द थे। शिवाजी की राज मुद्रा संस्कृत में लिखी हुयी एक अष्टकोणीय मुहर थी जिसका उपयोग अपने पत्रों एव सैन्य सामग्री में करते थे।

शिवाजी महाराज गुरिल्ला युद्ध के जनक, कुशल रणनीतिकार व वीरता, शौर्य, पराक्रम और दयालु स्वभाव के कारण जाने जाते हैं। शिवाजी महाराज न केवल मराठियों के सम्राट थे, बल्कि उनकी वीरता और पराक्रम के किस्से भारत के जन-जन हृदय में बसे हुए हैं। शिवाजी ने हिन्दू संस्कृति, पारम्परिक मूल्य और शिक्षा पर बहुत बल दिया। महान् हिन्दू शासक छत्रपति शिवाजी महाराज ने हिन्दू साम्राज्य का स्वप्न भारतवासियों को दिखाया एवं देश में धर्म, संस्कृति व समाज का संरक्षण कर स्वतंत्र राष्ट्र बनाये जाने की नींव डाली और समाज का खोया आत्मविश्वास पुनः जागृत किया। आज समाज को छत्रपति शिवाजी महाराज के आदर्शों व रणनीति के अनुरूप पुनः संगठित होने की आवश्यकता है।

जय भारत,

जय हिन्द,

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Prahlad Tandon

Basically I belongs to legal fraternity. For last twenty years I am providing my services to the people of India on behalf of Judiciary. I have done my graduation in commerce and completed my Master’s of Law . Thereafter inducted in Bihar Judicial Services, Later on in Uttar Pradesh Judiciary afterwards became member of Higher Judicial Services . Apart from I concentrated on Indian Institute of Management Kolkata and Successfully done. Execute Programme in Global Business Management (EPGBM). I am also providing my services to Indian Institute of Management Lucknow as a Guest Faculty on my vacations. Now, I realize at this juncture of my life that there is another horizon so I contemplated my services to this writing platform to aware myself and the people. I desire to be Blessed by People.

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