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हिन्दी-चीनी बाय-बाय

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भारत-चीन विवाद 2020-लद्दाख की गलवान घाटी में भारत को आर्थिक, व्यापारिक, सांस्कृतिक, कूटनीतिक व सीमा पर सामरिक, सैन्य चैतरफा रणनीति के सभी उपलब्ध व्यवहारिक विकल्पों पर विचार कर ठोस कदम उठाना चाहिए।

लद्दाख की गलवान घाटी में 15 जून की रात में भारत व चीन ताजा विवाद में सैनिको के बीच हिंसक झड़प हुई। जिसमें एक कर्नल सहित भारत के 20 जवान शहीद हो गये। चीन के भी कमांडिग ऑफिसर सहित 40 से अधिक सैनिक मारे गये। भारत और चीन की वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर इस हिंसक झड़प में सैनिकों की मृत्यु पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव द्वारा चिंता जताते हुए कहा कि दोनों पक्ष अधिकतम् संयम् रखते हुए स्थिति में नियंत्रण व सुधार लाने के लिए सकारात्मक बातचीत करें।

देश में चीन के विरूद्ध आक्रोश अपने चरम पर है भारतीय सैनिकों की शहीद की खबर आने से ही देश में जगह-जगह चीन के विरूद्ध प्रदर्शन हो रहे हैं एवं स्थान-स्थान पर चीन के सामानों को सार्वजनिक स्थलों पर, चैराहों पर जलाते हुये प्रदर्शन जारी हैं। देश की जनता चीन के पूर्ण बहिष्कार के लिए कटिबद्ध प्रतीत हो रही है।

देश के बड़े विपक्षी दल के नेता ने कहा है कि, ‘‘चीन की हिम्मत कैसे हुई हमारे सैनिकों को मारने की और हमारी जमीन पर कब्जा करने की। प्रधानमंत्री खामोश क्यों हैं? वह छिप क्यों रहे हैं और सीमा पर जवान बिना हथियार के कैसे गये थे?‘‘ जिस पर देश के प्रधानमंत्री ने कहा कि, ‘‘देश को इस बात का गर्व होगा कि वे मारते-मारते मरे हैं। हम किसी को उकसाते नहीं लेकिन जब भी समय आया हमने देश की अखण्डता और संप्रभुता की रक्षा करने के लिए अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है। भारत शांति चाहता है लेकिन उकसाने पर भारत यथोचित जवाब देने में सक्षम है एवं देश को भरोसा दिलाया कि जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जायेगा।‘‘ भारत-चीन सीमा विवाद के ताजा हालात पर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा 19 जून को एक सर्वदलीय वर्चुअल बैठक का आयोजन किया गया है जिसमें विभिन्न राजनीतिक दलों के अध्यक्ष चर्चा में भाग लेंगे।

चीन की हिम्मत बढ़ने का सफर सन् 1959 से शुरू होता है जब चीन में तिब्बत विद्रोह के बाद इस देश की धरती पर तिब्बती बौद्ध गुरू को शरण दी जाती है तब से भारत-चीन सीमा पर हिंसक घटनाओं की श्रृंखला शुरू हो गयी। जिसकी परिणीति सन् 1962 में चीन के हाथों हमारी(भारत) शर्मनाक हार से हुई। हमारी(भारत) 38,000 वर्ग किमी भू-भाग पर चीन द्वारा कब्जा कर लिया जाता है और भारत पंचशील समझौता और हिन्दी-चीनी भाई-भाई की ढपली बजाता रहा। इसके बाद चीन को जब कभी जमीन कम पड़ी तो हमारे देश में घुसता और जमीन(भू-भाग) का एक टुकड़ा काट कर ले जाता मानों जमीन का टुकड़ा ना होकर केक का टुकड़ा हो गया और हम बेफिक्र कि चलो केक तो खराब हो गया था, जमीन का टुकड़ा वो ले गये भले ही बर्फ से भरा था। इन सब टुकड़ों को भारत-चीन विवाद के इतिहास में जाकर जोड़ा जा सकता है। भाईचारे के नारे से चीन बड़ा भाई बन बैठा तो हिम्मत हमेशा उसमें रही और थप्पड़ के लिए गाल भी हमारा आगे रहा तो मरते भी रहे और बेकार जमीन बर्फ का रेगिस्तान भी, तो फर्क भी क्या पड़ता है वो टुकड़ा काटकर ले जाते रहे।

भारत-चीन युद्ध सन् 1962 में हार के कारणों की जांच हेतु एक समिति लेफ्टिनेन्ट जनरल हेडरसन् ब्रुक्स ओर ब्रिगेडियर पी0एस0 भगत की बनाई गई थी। समिति द्वारा हार के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री को जिम्मेदार माना गया था जिसके कारण उक्त रिपोर्ट को कभी भी जनता के सामने उजागर नहीं किया गया और देश सुरक्षा के नाम पर गोपनीय रखा गया और आज स्वयं वारिसों द्वारा खुलासे की मांग की जा रही है तो उक्त रिपोर्ट से भी परदा उठना देश की जनता के लिए आवश्यक हो गया है ताकि सच जाना जा सके जिससे इतिहास को बदलने में बदले दौर में बदला जा सकने में मदद मिल सके।

समय बदला, दौर बदला, हुक्मरान बदले, फिर बड़े भाई चीन ने वही हरकत दोहराई, उसकी जमीन फिर छोटी पड़ गई, वो फिर जमीन के एक टुकड़े डोकलाम को काटकर ले जाने आया परन्तु इस बार उसे क्रीम लगे केक के स्थान पर लोहे के चने हाथ लगे, जिससे जायका कुछ खराब हो गया है। चीन की तरफ से स्वीकारोक्ति आई कि आक्रमणकारी शांति के विषय में बेतुकी बातें कर रहे हैं। अन्र्तराष्ट्रीय समुदाय के सामने भारत स्वीकार करे कि भारत ने चीन पर हमला किया है, भारत जवाब दे। पहली बार भारत-चीन डोकलाम विवाद में सख्ती के साथ चीन का हाथ भारत द्वारा थामा गया था अन्यथा शांत रहते तो फिर एक टुकड़ा हाथ से निकल जाता तो ऐसी क्रिया पर प्रतिक्रिया तो होनी ही थी, बस उचित मौके का इंतजार था।

यह राजनीतिक, रणनीतिक, सैन्य विफताओं पर उठाया गया भारत-चीन विवाद पर पहला ठोस कदम था। वर्तमान में जिसको ग्लोबल टाइम्स जो चीन का सरकारी अखबार है ने स्वीकार किया है कि गलवान घाटी में चीन का नुकसान हुआ है। क्षति का तुलनात्मक रूप से अध्ययन भावनायें भड़काने वाली हो सकती हैं। सीमा पर निर्माण को लेकर भारत अहंकार और संवेदनहीनता दिखा रहा है एवं हाल के वर्षों में दिल्ली ने सख्त रूख अपनाया है, भारत ना भूले कि चीन से ज्यादा शक्तिशाली सैन्य क्षमता में नहीं है। भारत अमेरिका की रणनीति में फंसकर गलत धारणा बना रहा है जिससे हालात बेकाबू हो सकते हैं। चीन, भारत के साथ युद्ध नहीं चाहता है, यह मजबूरी नहीं है। इस तरह के बयान चीन द्वारा भारत-चीन ताजा विवाद पर चीन की स्थिति बयां करती है।

भारतीय सैनिकों की 45 वर्ष बाद सन् 1975 के पश्चात् पहली बार ऐसी हिंसक झड़प हुई है। चीन के विदेश मंत्रालय द्वारा सीमा पर स्थिति ‘स्थिर और नियंत्रित है और दोनों देश बातचीत के जरिए तनाव सुलझा रहे हैं बताई है।‘ तमाम मुख्य चीनी अखबारों में भारत-चीन ताजा विवाद घटना की रिपोर्टिंग भी नहीं है और नुकसान का आंकलन भी चीन द्वारा नहीं बताया गया है। ग्लोबल टाइम्स भारत पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाते हुए हाईड्रोजन बम की धमकी और दावा है कि पकिस्तान, नेपाल भी चीन का साथ दे सकते हैं।

चीन अपने देशवासियों से धटनाक्रम को स्वयं छुपा रहा है विश्व भर में कोरोना महामारी फैलाये जाने के कारण पहले से चीन की साख पर पर्याप्त बट्टा लग चुका है। स्वयं उसके देश में महामारी से लाखों देशवासी काल के ग्रास हो गये हैं, चीन में घरेलू विद्रोह से इंकार नहीं किया जा सकता है व चीन से विश्व के अनेक देश अपने उद्योगों को चीन से बाहर ले जाने को आतुर हैं। चीन के कुकृत्यों से विश्व के अधिकांश बड़े देशों में आक्रोश है। अमेरिका से भारत की निकटता चीन को परेशान किये हुये है। अमेरिका का हित भी भारत के मजबूत रहने में ही है, यह उसकी समझ में भी आ चुका है। चीन, तिब्बत, ताइवान और हांगकांग की भी समस्या से जूझ रहा है। अपने देशवासियों, पड़ोसी देशों व विश्व को उलझाये रखने का प्रयास चीन द्वारा किया जा रहा है।

भारत द्वारा सन् 1993, 1996, 2013 में ऐसे समझौते चीन से किए गए कि वास्तविक नियत्रंण रेखा के 2 किमी के दायरे में शस्त्र बन्दूक आदि दोनों देशों के सैनिक नहीं ले जायेंगे, इन समझौतों को तत्काल रद्द करने के लिए विचार करने की आवश्यकता है। ऐसे में भारत को आर्थिक, व्यापारिक, सांस्कृतिक, कूटनीतिक, सीमा पर सामरिक, सैन्य चैतरफा रणनीति के सभी उपलब्ध व्यवहारिक विकल्पों पर विचार कर ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

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Prahlad Tandon

Basically I belongs to legal fraternity. For last twenty years I am providing my services to the people of India on behalf of Judiciary. I have done my graduation in commerce and completed my Master’s of Law . Thereafter inducted in Bihar Judicial Services, Later on in Uttar Pradesh Judiciary afterwards became member of Higher Judicial Services . Apart from I concentrated on Indian Institute of Management Kolkata and Successfully done. Execute Programme in Global Business Management (EPGBM). I am also providing my services to Indian Institute of Management Lucknow as a Guest Faculty on my vacations. Now, I realize at this juncture of my life that there is another horizon so I contemplated my services to this writing platform to aware myself and the people. I desire to be Blessed by People.

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