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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद – भारत अस्थाई सदस्य

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भारत की अपनी 75 वीं स्वतंत्रता वर्षगांठ पर सुरक्षा परिषद की अस्थाई सदस्यता को स्थाई सदस्यता में बदले जाने का सुअवसर एक उभरती हुई महाशक्ति होने की रणनीति के रूप में प्राप्त हुआ प्रतीत होता है, सिर्फ इसका मजबूत व सफल प्रायोजन ही किया जाना शेष है।

वर्तमान अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य में भारत का संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अस्थाई रूप से 8वीं बार चुना जाना भारत की वैश्विक दृष्टि को मजबूती प्रदान करता नजर आता है। भारत के प्रधानमंत्री द्वारा संयुक्त राष्ट्र में भारत की सदस्यता के लिए वैश्विक समुदाय से मिले शानदार समर्थन के लिए धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा है कि, ‘‘भारत सभी सदस्य देशों के साथ मिलकर वैश्विक शांति, सुरक्षा और समानता के लिए काम करेगा।‘‘ भारत 1950-51, 1967-68, 1972-73, 1977-78, 1984-85, 1991-92, 2011-12 के पश्चात 2021-22 के लिए चुना गया है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थाई व अस्थाई दो प्रकार के सदस्य होते हैं। इस समय पांच स्थाई और दस अस्थाई सदस्य हैं। स्थाई सदस्य अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन हैं। हर वर्ष संयुक्त राष्ट्र महासभा दो साल के कार्यकाल के लिए पांच अस्थाई सदस्यों को चुनती है। भारत आठवीं बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थाई सदस्य चुना गया है।

संयुक्त राष्ट्र की स्थापना 24 अक्टूबर सन् 1945 को संयुक्त राष्ट्र अधिकार पत्र पर 50 देशों के हस्ताक्षर से हुई जिसका उद्देश्य अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा, विश्व शांति, मानव अधिकार, आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति एवं द्वितीय विश्वयुद्ध के हालात पुनः कभी बने तो अन्तर्राष्ट्रीय संघर्ष में हस्तक्षेप कर ऐसे संकट पुनः उत्पन्न ना हो सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी देशों के हस्ताक्षर के साथ अस्तित्व में आया।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सदस्यता के साथ ही स्थाई व अस्थाई सदस्यता को लेकर भारत में चर्चा शुरू हो जाती है जबकि भारत संयुक्त राष्ट्र का संस्थापक सदस्य देश था। संयुक्त राष्ट्र स्थापना के समय चीन के स्थान पर ताइवान सदस्य हुआ करता था जो सन् 1971 तक संयुक्त राष्ट्र में सदस्य बना रहा। चीन की स्थिति अत्यधिक कमजोर थी इसके उपरान्त स्थाई सदस्य भारत का ना बन पाना विवाद को हमेशा जन्म देता रहा है जिसका उल्लेख भारत में लिखित कई किताबों में मिलता है। भारत को संयुक्त राष्ट्र के सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्य बनने का प्रस्ताव मिला था, परन्तु तत्कालीन भारत के पहले प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र में सुरक्षा परिषद की सीट को लेने से इंकार कर दिया और इस स्थाई सीट को चीन को दिलावा दिया। जिसका उल्लेख शशि थरूर द्वारा लिखित किताब ‘नेहरू- द इन्वेंशन आॅफ इंडिया‘ में मिलता है। जिसके संबंध में तत्कालीन प्रधानमंत्री द्वारा कहा गया था कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्य बनने के लिए औपचारिक या अनौपचारिक रूप से कोई प्रस्ताव नहीं मिला था।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अस्थाई तौर पर चुने जाने पर अमेरिका के राजदूत केनेथ जस्टर ने कहा कि ‘‘अमेरिका एक स्थिर, सुरक्षित, और समृद्धशाली दुनिया के लिए भारत के साथ काम करने के लिए भारत को 2021-22 के लिए सदस्य बनाया गया है।‘‘ रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि, ‘‘रूस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्य के तौर पर भारत की उम्मीदवारी का समर्थन करते हैं।‘‘ स्थाई सदस्यता के लिए रूस, अमेरिका, फ्रांस व अन्य पश्चिमी देशों का समर्थन प्राप्त है।

वैश्विक परिदृश्य में जबकि चीन की स्थिति विश्व समुदाय में अत्यन्त संदिग्ध, कमजोर व अविश्वसनीय हो गई है, विश्व के अमेरिका, फ्रांस, स्पेन, ब्रिटेन व रूस जैसे बड़े देश भारत की स्थाई सदस्यता का समर्थन भी पूर्व से करते चले आ रहे हैं। चीन का आर्थिक व सामाजिक बहिष्कार विश्व समुदाय द्वारा किया ही जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र का विस्तारित होना भी अपेक्षित है ऐसे सुअवसर का लाभ उठाते हुए विश्व पटल पर चीन का संयुक्त राष्ट्र में वीटो का अधिकार कम किये जाने व विश्व में कोरोना महामारी को लेकर कुछ प्रतिबन्ध चीन पर लगाने के लिए प्रस्तावित किया जाना भारत की अपनी 75वीं स्वतंत्रता वर्षगांठ पर सुरक्षा परिषद की अस्थाई सदस्यता को स्थाई सदस्यता में बदले जाने का सुअवसर एक उभरती हुई महाशक्ति होने की रणनीति के रूप में प्राप्त हुआ प्रतीत होता है सिर्फ इसका मजबूत व सफल प्रायोजन ही किया जाना शेष है।

जय भारत,
जय हिन्द,

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Prahlad Tandon

Basically I belongs to legal fraternity. For last twenty years I am providing my services to the people of India on behalf of Judiciary. I have done my graduation in commerce and completed my Master’s of Law . Thereafter inducted in Bihar Judicial Services, Later on in Uttar Pradesh Judiciary afterwards became member of Higher Judicial Services . Apart from I concentrated on Indian Institute of Management Kolkata and Successfully done. Execute Programme in Global Business Management (EPGBM). I am also providing my services to Indian Institute of Management Lucknow as a Guest Faculty on my vacations. Now, I realize at this juncture of my life that there is another horizon so I contemplated my services to this writing platform to aware myself and the people. I desire to be Blessed by People.

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